प्रशासन की नाक के नीचे सुलग रही 'पट्टी-चांदा' रोड: कूड़ा निस्तारण के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़
प्रशासन की नाक के नीचे सुलग रही 'पट्टी-चांदा' रोड: कूड़ा निस्तारण के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़
पट्टी। एक तरफ जहाँ उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत पट्टी के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सड़क किनारे जहर घोल रही है। पट्टी-चांदा मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से फेंका जा रहा नगर पंचायत का कूड़ा न केवल राहगीरों के लिए मुसीबत बना है, बल्कि 24 घंटे सुलगती आग से निकलता धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है।
करोड़ों का निस्तारण केंद्र सफेद हाथी, सड़क किनारे लग रहा अंबार
हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत पट्टी के कूड़ा निस्तारण के लिए धौरहरा (आसपुर देवसरा) में बाकायदा प्लांट बनाया गया है। नियमतः शहर का सारा कचरा वहां ले जाकर वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारित किया जाना चाहिए। लेकिन लागत और मेहनत बचाने के चक्कर में सफाई कर्मी और जिम्मेदार ठेकेदार पट्टी-चांदा सड़क के किनारे ही कूड़े का ढेर लगा रहे हैं।
दोहरा मापदंड: किसान पर कार्रवाई, विभाग पर चुप्पी?
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि:
"अगर कोई गरीब किसान अपने खेत में अनजाने में पराली जला देता है, तो प्रशासन के लोग तुरंत 'पर्यावरण की दुहाई' देकर भारी जुर्माना और मुकदमे की कार्रवाई करते हैं। लेकिन यहाँ महीनों से नगर पंचायत खुद सड़क किनारे कूड़े में आग लगा रही है, जिससे जहरीला धुआं निकल रहा है। क्या सरकारी विभागों के लिए पर्यावरण के नियम अलग हैं?"
खतरे में राहगीर और वन्य जीवन
दुर्घटना की आशंका: सड़क किनारे कूड़ा सुलगने से उठने वाला घना धुआं अक्सर विजिबिलिटी (दृश्यता) कम कर देता है, जिससे पट्टी-चांदा मार्ग पर बड़ी सड़क दुर्घटना होने का भय बना रहता है।स्वास्थ्य पर प्रभाव: कूड़े में प्लास्टिक और अन्य केमिकल होने के कारण उससे निकलने वाला धुआं सांस और आंखों की बीमारियों को न्यौता दे रहा है।मौन प्रशासन: महीनों से चल रहे इस खेल पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।सड़क किनारे अवैध रूप से कूड़ा डंप करना और उसे जलाना एनजीटी (National Green Tribunal) के नियमों का सीधा उल्लंघन है। यदि जल्द ही इस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो यह न केवल संक्रामक बीमारियों का केंद्र बनेगा, बल्कि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की छवि को भी धूमिल करेगा।
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