जीवन की सार्थकता संस्कारों पर ही आधारित है - ओमप्रकाश
जीवन की सार्थकता संस्कारों पर ही आधारित है - ओमप्रकाश
पट्टी।व्यक्ति के जीवन की सार्थकता तभी पूर्ण हो सकती है जब व्यक्ति संस्कारों का पालन जीवन में करता है क्योंकि संस्कार जी जीवन को मजने का कार्य करते हैं। उक्त बाते स्थानीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पट्टी की राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन के अभिमुखी कारण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रतापगढ़ के विभाग प्रचारक ओमप्रकाश जी ने कही अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने आगे कहा की शिविरार्थियों जिस तरह से वैश्विक स्तर पर तेजी से परिवर्तन हो रहा है उस परिवर्तन के साथ यह एक तरफ आप सब को चलना है वहीं दूसरी तरफ जीवन को सजाने को संवारने के लिए संस्कारित होना भी आवश्यक है। विभाग प्रचारक जी ने अपने उद्बोधन के उपरांत शिविरार्थियों से जैसे यूजीसी , राष्ट्रीय शिक्षा नीति, ईरान इजराइल युद्ध जैसे ज्वलंत समस्याओं पर सवाल पूछा और शिविरार्थियों ने अपना विचार बढ़ - चढ़ कर प्रस्तुत किया।अभिमुखीकरण कार्यक्रम के प्रारंभ में विभाग प्रचारक गांव लहरिया न्यूज चैनल के ब्यूरो चीफ आशीष त्रिपाठी जी ने मां सरस्वती तथा स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। सरस्वती वंदना लक्ष्मी गुप्ता तथा स्वागत गीत दीक्षा मिश्रा ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत डॉ रागनी सोनकर ने किया। आभार ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ देवेन्द्र नारायण पाण्डेय ने व्यक्त किया। उक्त जानकारी महाविद्यालय के जन सूचना अधिकारी डॉ वीरेंद्र कुमार मिश्र ने दिया है।
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