पीएम सूर्य घर योजना में लापरवाही का आरोप, पैनल उड़ने से उपभोक्ता परेशानघटिया इंस्टॉलेशन से 3 किलोवाट सोलर सिस्टम क्षतिग्रस्त, कार्रवाई न होने से बढ़ी नाराजगी

पीएम सूर्य घर योजना में लापरवाही का आरोप, पैनल उड़ने से उपभोक्ता परेशान

घटिया इंस्टॉलेशन से 3 किलोवाट सोलर सिस्टम क्षतिग्रस्त, कार्रवाई न होने से बढ़ी नाराजगी
पट्टी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत लगाए जा रहे रूफटॉप सोलर सिस्टम की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पट्टी तहसील क्षेत्र के मेन रोड निवासी कमलेश सोनी ने सौर ऊर्जा विभाग, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और संबंधित अधिशासी अभियंता को लिखित शिकायत देकर गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही का आरोप लगाया है।
पीड़ित कमलेश सोनी के अनुसार उन्होंने करीब 1 लाख 80 हजार रुपये की लागत से अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाया था। यह सिस्टम 29 नवंबर 2025 को कार्यदाई संस्था द्वारा स्थापित किया गया। आरोप है कि इंस्टॉलेशन के दौरान मानकों की अनदेखी की गई और सोलर पैनलों को पर्याप्त मजबूती से नहीं लगाया गया।
कमलेश का कहना है कि इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि 4 अप्रैल को आई हल्की हवा में ही सोलर पैनल अपनी जगह से उखड़कर उड़ गया और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि अगर तेज आंधी होती तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
घटना के बाद से पीड़ित को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर उन्हें नियमित बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सोलर सिस्टम की किस्त भी जारी है। उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायत देने के साथ-साथ फोन के माध्यम से भी अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में और गंभीर पहलू यह है कि जनपद में सोलर सिस्टम लगाने का कार्य कर रही कार्यदाई संस्था रामा इंटर प्राइजेज के अधिकारी हिमांशु त्रिपाठी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने लगातार टालमटोल किया। पीड़ित के अनुसार, करीब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो पैनल की मरम्मत कराई गई और न ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी स्वीकार की गई।
कमलेश सोनी ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की लापरवाही से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की छवि धूमिल हो रही है और आम उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए।
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चल रहे सोलर इंस्टॉलेशन कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो योजना का लाभ लेने से लोग पीछे हट सकते हैं।
बड़ा सवाल:
जब केंद्र सरकार स्वच्छ ऊर्जा और मुफ्त बिजली को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो आखिर जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

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