नगर पंचायत पट्टी: 'नौवा तारा तालाब' के सौंदर्यीकरण में 40 लाख का बंदरबांट करने का आरोप कागजों पर ही सिमटा काम

नगर पंचायत पट्टी: 'नौवा तारा तालाब' के सौंदर्यीकरण में 40 लाख का बंदरबांट करने का आरोप
 कागजों पर ही सिमटा काम
पट्टी।उत्तर प्रदेश सरकार भले ही तालाबों के संरक्षण और उनके कायाकल्प के लिए खजाना खोल रही हो, लेकिन नगर पंचायत पट्टी में जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता सरकारी मंशा पर पानी फेर रही है। वार्ड संख्या-08 स्थित 'नौवा तारा तालाब' के सौंदर्यीकरण के नाम पर 40 लाख रुपये की धनराशि का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन धरातल पर आज भी तालाब बदहाली के आंसू बहा रहा है। मामले में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शिवम् सिंह ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सहित अन्य से की है।
शासन के नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगरीय झील/तालाब संरक्षण योजना के तहत बड़ी धनराशि आवंटित की गई थी। इसी कड़ी में प्रतापगढ़ जनपद की नगर पंचायत पट्टी को वार्ड संख्या-08 स्थित 'नौवा तारा तालाब' के सौंदर्यीकरण हेतु 55.06 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। स्वीकृत बजट के सापेक्ष विभाग ने पहली किस्त के रूप में 40 लाख रुपये की बड़ी धनराशि निकाल ली।
शासन का स्पष्ट निर्देश था कि तालाबों का जीर्णोद्धार शीर्ष प्राथमिकता पर हो और कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। अधिवक्ता शिवम् सिंह ने शासन की इसी गाइडलाइन का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि न तो तालाब का सुंदरीकरण हुआ और न ही कोई निर्माण कार्य ही देखने को मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर 40 लाख रुपये की यह बड़ी धनराशि कहाँ खर्च कर दी गई?
इस कथित भ्रष्टाचार को गंभीरता से लेते हुए अधिवक्ता शिवम् सिंह ने इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने दिनांक 17 मार्च, 2025 के तहत जारी बजट के दुरुपयोग की विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि तालाब के सौंदर्यीकरण हेतु 17 लाख रुपये का भुगतान बिजली के सामान और खंभों की खरीद के लिए किया गया है, जिसके बिल और साक्ष्य हमारे पास मौजूद हैं। बाकी सभी आरोप निराधार हैं।"
अब देखना यह होगा कि अधिवक्ता शिवम् सिंह द्वारा मुख्यमंत्री स्तर पर की गई शिकायत के बाद प्रशासन इस कथित घोटाले पर क्या कदम उठाता है।

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