पार्सल डिलीवरी के नाम पर कॉल फॉरवर्डिंग कर हैक करते थे वाट्सऐप, तीन गिरफ्तार

पार्सल डिलीवरी के नाम पर कॉल फॉरवर्डिंग कर हैक करते थे वाट्सऐप, तीन गिरफ्तार
प्रतापगढ़। पार्सल डिलीवरी और पता सत्यापन के नाम पर मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कर वाट्सऐप अकाउंट हैक करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बिहार के शेखपुरा जिले के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और तीन सिमकार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस की जांच में गिरोह से जुड़े 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 80 साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों में करीब 37.79 लाख रुपये की ठगी का पता चला है।शहर के पल्टन बाजार निवासी एक व्यक्ति ने 22 जून को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि जालसाजों ने पार्सल डिलीवरी के नाम पर उसे झांसे में लेकर मोबाइल पर एक विशेष कोड डायल कराया। कोड डायल करते ही मोबाइल नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसके बाद आरोपियों ने दोनों मोबाइल नंबरों के वाट्सऐप अकाउंट पर नियंत्रण हासिल कर रिश्तेदारों और परिचितों से रुपये की मांग कर ठगी की।
मामले में साइबर क्राइम थाने में बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी), 66(डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। तकनीकी जांच के आधार पर बिहार के शेखपुरा जिले के नसरतपुर गांव निवासी अमित कुमार, लालटुश कुमार और सोनू कुमार को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।

गूगल सर्च से जुटाते थे मोबाइल नंबर

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य इंटरनेट और गूगल सर्च के जरिये लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर जुटाते थे। इसके बाद फर्जी या दूसरे सिमकार्ड से फोन कर खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताते थे। पार्सल डिलीवरी अथवा पता सत्यापन के नाम पर पीड़ित से एक कोड डायल कराया जाता था।
कोड डायल करते ही मोबाइल की इनकमिंग कॉल आरोपियों के नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती थी। इसके बाद आरोपी कॉल आधारित सत्यापन का दुरुपयोग कर वाट्सऐप अकाउंट पर नियंत्रण हासिल कर लेते थे। फिर पीड़ित के रिश्तेदारों और परिचितों को बीमारी, दुर्घटना या अस्पताल में भर्ती होने का बहाना बनाकर रुपये मांगे जाते थे। रकम फर्जी बैंक खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से हासिल की जाती थी।

15 राज्यों में 80 शिकायतें

समन्वय पोर्टल पर जांच में आरोपियों से जुड़े 80 साइबर ठगी के मामले सामने आए। महाराष्ट्र में 22, उत्तर प्रदेश में 21, बिहार और पश्चिम बंगाल में छह-छह, दिल्ली में चार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड में तीन-तीन शिकायतें मिलीं। हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात और झारखंड में दो-दो तथा जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में एक-एक शिकायत सामने आई। इन मामलों में कुल करीब 37 लाख 79 हजार 247 रुपये की ठगी का पता चला है।इस मामले में पुलिस ने 27 जुलाई को शेखपुरा के नसरतपुर निवासी पुटुश कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों व डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है।

तीन मोबाइल और सिम बरामद

आरोपियों के कब्जे से वनप्लस नॉर्ड सीई 2, वीवो टी2एक्स 5जी और रियलमी 12 प्रो प्लस 5जी मोबाइल फोन तथा एयरटेल के दो और जियो का एक सिमकार्ड बरामद हुआ है। कार्रवाई पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी नगर आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस टीम ने की।लोगों से अपील: पुलिस ने लोगों से अपील की है कि पार्सल डिलीवरी, बैंकिंग, केवाईसी या सिम सत्यापन के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई कोड डायल न करें। ओटीपी, बैंक विवरण और यूपीआई पिन किसी से साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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