विपश्यनाचार्य गोयनका की 13वीं पुण्यतिथि पर सामूहिक ध्यान साधना
विपश्यनाचार्य गोयनका की 13वीं पुण्यतिथि पर सामूहिक ध्यान साधना
प्रतापगढ़। विपश्यनाचार्य सत्य नारायण गोयनका की 13वीं पुण्यतिथि पर सुगतानंद बुद्ध विहार में उपासकों और उपासिकाओं ने सामूहिक ध्यान साधना कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वर्षावास के दौरान अष्टशील अधिष्ठान साधकों और आचार्यों के सानिध्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ। वहीं पालि भाषा पखवाड़े के तहत भंते शांतिमित्र के सानिध्य में परित्राण पाठ और दीपदान किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता राम उमरवैश्य ने की। उन्होंने बताया कि सुगतानंद बुद्ध विहार में गुरु सत्य नारायण गोयनका ने वर्ष 1970 में 14वां विपश्यना शिविर आयोजित किया था, जिसमें करीब 15 देशों के साधकों ने भाग लिया था। वर्षावास उपोसथ अधिष्ठाता आचार्य राजीव बौद्ध ने कहा कि गोयनका ने म्यांमार में आचार्य सिया जी उ बा खिन से 14 वर्षों तक विपश्यना सीखी और 1969 में भारत लौटकर इस साधना को व्यापक स्तर पर पहुंचाया।आचार्य उमेश चंद्र ने पालि भाषा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए 10 दिवसीय विपश्यना शिविर में सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 90 देशों में 170 केंद्र संचालित हैं। सुरेंद्र कुमार विमल ने उत्तर प्रदेश में भी सरकारी कर्मचारियों को विपश्यना शिविर में शामिल होने के लिए अवकाश देने की मांग की। वहीं पालि भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय पालि संस्थान के गठन की मांग भारत सरकार से करने की बात कही गई। कार्यक्रम में राकेश कनोजिया, वेद प्रकाश समेत कई लोग मौजूद रहे।
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