कोतवाली कांडएक प्रेम कहानी, एक मौत और सिस्टम की उलझन
कोतवाली कांड
एक प्रेम कहानी, एक मौत और सिस्टम की उलझन
बेलखरनाथ धाम। प्रतापगढ़
पट्टी कोतवाली में हुई एक मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। यह सिर्फ एक युवक की मौत का मामला नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, दो परिवारों के दर्द और जातीय सियासत का ऐसा घालमेल है, जिसने मोलनापुर गांव को छावनी में बदल दिया है।
*घटना क्या थी?*
मोलनापुर गांव का एक युवक गांव की ही एक किशोरी को लेकर दिल्ली भाग गया था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस दोनों को दिल्ली से पकड़ लाई। बताया जा रहा है कि कोतवाली में पूछताछ के दौरान ही सोमवार सुबह युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी।
*पुलिस की कार्यशैली पर सवाल*
सबसे बड़ा सवाल यहीं है। पुलिस अभिरक्षा में मौजूद युवक ने फांसी कैसे लगा ली? उसकी निगरानी कौन कर रहा था? कोतवाली जैसे संवेदनशील स्थान पर अभिरक्षा में मौत पुलिस की लापरवाही को उजागर करती है। फिर इस मौत को छुपाने के लिए पुलिस ने आनन-फानन में क्या किया? सूत्रों के अनुसार दूसरे पक्ष यानी ब्राह्मण परिवार पर हत्या व एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कर दिया गया,ताकि मामला सवर्ण बनाम दलित बन जाए और पुलिस की चूक पर पर्दा पड़ जाए।
*दो परिवार, दो तरह का दर्द*
एक तरफ मृतक युवक का परिवार है जिसने बेटा खोया। 20 घंटे के हंगामे के बाद आर्थिक सहायता व जमीन के लिखित समझौते पर अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन क्या यह न्याय है?
दूसरी तरफ वह ब्राह्मण परिवार है जो कह रहा है कि मेरी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया मैंने पट्टी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया पुलिस पकड़कर लाई तो हम लोगों के विरुद्ध एससी एसटी व हत्या का फर्जी मुकदमा क्यों लाद दिया गया।इसी को लेकर आज पूरा अधिवक्ता समाज , ब्राह्मण समाज सड़क पर है तथा तहसील और रजिस्ट्री कार्यालय में ताला बंदी हुई।
पुलिस की एक चूक ने दो परिवारों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।जरूरत थी स्वतंत्र जांच की,लेकिन पुलिस ने मुकदमे की आड़ में जातीय टकराव का बीज बो दिया। जिससे मोलनापुर गांव में पुलिस व पीएसी का पहरा है।
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