प्रसुताओं के आहार पर अस्पताल कर्मियों का डांका ,आखिर इसका जिम्मेदार कौन, विभाग मौन
प्रसुताओं के आहार पर अस्पताल कर्मियों का डांका
,आखिर इसका जिम्मेदार कौन, विभाग मौन
प्रमोद मिश्रा संवाददाता
पट्टी। सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं को दिए जाने वाले आहार पर अस्पताल के कर्मचारी ही डांका डाल रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों को मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा। लापरवाही का आलम यह है कि नाश्ते में दिये जाने वाले कच्चे दूध को दोपहर में दिया जाने वाले भोजन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। शाम को सिर्फ नाम के लिए ही दलिया रह जाता है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टी में भर्ती के दौरान नॉरमल डिलीवरी के बाद 48 घंटे और सिजेरियन को आठ से दस दिन अस्पताल में भर्ती रखा जाता है। इस दौरान भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा ही की जाती है। प्रसूताओं को भर्ती के दौरान पौष्टिक आहार देने के लिए सरकार के द्वारा लाखों रुपये का बजट दिया जाता है, जिससे की मरीजों को समय पर आहार मिल सके, लेकिन अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन में गड़बड़झाला देखने को मिल रहा है। अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं को मेन्यू के अनुसार नाश्ता और भोजन नहीं दिया जा रहा है। अस्पताल में सुबह, दोपहर और शाम को दिए जाने वाला आहार 90 रुपये का होता है। सुबह के नाश्ते में दूध का पैकेट, ब्रेड, अंडा और दलिया है। सीएचसी में भर्ती प्रसूताओं को किसी भी तरह का आहार नहीं दिया जा रहा है। वहीं दोपहर और शाम को भी कुछ नहीं दिया जा रहा है जिसके चलते प्रसूताओं को खुद से ही सबकुछ खरीदना पड़ रहा है। दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया था। नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा हुआ है। सुबह नाश्ते में दूध, दलिया और ब्रेड जहां नहीं दिया जा रहा है वहीं दोपहर में भी खाने के लिए कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। बाजार से ही खाना मंगवा कर मरीज खा रहे हैं।
पट्टी तहसील क्षेत्र के अलग-अलग गांव की प्रसूताओं रंजना पत्नी बलराम यादव निवासी मुजाही, पूजा गौड़ पत्नी दीप कुमार निवासी बहुता व कस्बे के पुरानी पट्टी मोहल्ले की रोली गौड़ को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर नार्मल डिलीवरी के बाद शुक्रवार सुबह तक प्रसूता को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिली वहीं शाम को खाने में भी कुछ नहीं दिया गया था। सुबह के समय काफी इंतजार के बाद न तो दलिया, कच्चा दूध का पैकेट और ब्रेड दिया गया और न ही शाम को ही कुछ दिया गया। जिसको लेकर तीमारदारों में आक्रोश नजर आया। मामले में मरीजों के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा अस्पताल आने वाली प्रसुताओं को दी जाने वाली सुविधाओं को स्वयं अस्पताल कर्मी डकारते हुए डांका डाल रहे हैं जिस पर जिम्मेदारों को कार्रवाई करनी चाहिए। आखिर प्रसूताओं को दिए जाने वाले आहार को कौन खा रहा है, इसका जिम्मेदार कौन है यह एक बड़ा सवाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टी की व्यवस्थाओं और सुविधाओं पर उठता नजर आ रहा है।
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