बुलडोजर के निशान मिटे नहीं, कब्जे की कोशिश फिर शुरू,बैनामे की जमीन पर निर्माण का आरोप
बुलडोजर के निशान मिटे नहीं, कब्जे की कोशिश फिर शुरू,
बैनामे की जमीन पर निर्माण का आरोप
कुंडा प्रतापगढ़। बाघराय थाना अंतर्गत कमासिन चौकी क्षेत्र के भीटी पूरे नैन में जमीन विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। कुछ दिन पहले जिस विवादित परिसर पर वन विभाग का बुलडोजर गरजा था, आरोप है कि उसी जमीन पर अब दोबारा निर्माण कर कब्जे की कोशिश शुरू कर दी गई है। कार्रवाई के बावजूद निर्माण की कवायद ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िता शहीदा बेगम पत्नी शहाबुद्दीन ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 399 में से 9×40 फीट भूमि का उन्होंने विधिवत बैनामा कराया है। इसके बावजूद गांव के सजाउद्दीन पुत्र अब्दुल अजीज द्वारा अपने परिजनों के साथ मिलकर उनकी जमीन पर जबरन निर्माण कराया जा रहा है।स्थानीय स्तर पर यह मामला पहले भी चर्चा में रहा है। विवादित स्थान पर संचालित कथित आरा मशीन के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर से निर्माण ध्वस्त कराया था। अब उसी स्थान पर फिर से निर्माण शुरू होने के आरोप ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।पीड़ित परिवार का कहना है कि कार्रवाई के बाद उन्हें उम्मीद थी कि विवाद थमेगा, लेकिन आरोप है कि दबंगई के बल पर दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
तहरीर के मुताबिक, जब पीड़ित परिवार ने अपनी जमीन पर निर्माण का विरोध किया तो सजाउद्दीन और उसकी पत्नी शलीमुन्निशा पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि कथित गाली-गलौज और विवाद का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि सजाउद्दीन का संबंधित गाटे में कोई मालिकाना हक नहीं है। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे की कोशिश किए जाने से परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वन विभाग पहले ही मौके पर कार्रवाई कर चुका था, तो उसी स्थान पर दोबारा निर्माण की नौबत कैसे आई? क्या निर्माण के लिए कोई वैध आदेश या अनुमति है?
पीड़ित परिवार ने पुलिस-प्रशासन से मौके पर पहुंचकर निर्माण तत्काल रुकवाने, जमीन के दस्तावेजों की जांच कराने, आरोपों की निष्पक्ष जांच करने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि जिस जमीन पर पहले वन विभाग का बुलडोजर चला था, वहां दोबारा कब्जे के आरोप पर बाघराय पुलिस और राजस्व प्रशासन भी उतनी ही सख्ती दिखाता है या मामला तहरीर और शिकायतों की फाइलों में ही दबकर रह जाता है।
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