ग्रामीण पर्यटन से गांवों को मिलेगी नई पहचान, रोजगार के खुलेंगे रास्ते,हंडौर, कुंभापुर और मनगढ़ का भ्रमण कर ग्रामीणों की जीवनशैली, पारंपरिक कला और खेती के तौर-तरीकों को जाना
ग्रामीण पर्यटन से गांवों को मिलेगी नई पहचान, रोजगार के खुलेंगे रास्ते,
हंडौर, कुंभापुर और मनगढ़ का भ्रमण कर ग्रामीणों की जीवनशैली,
पारंपरिक कला और खेती के तौर-तरीकों को जाना
बिंदु वर्मा ब्यूरो चीफ
प्रतापगढ़। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से गांवों की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने और स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने की पहल की जा रही है। स्टेट माई विजिट एवं ग्रामीण पर्यटन विभाग की रूरल ग्राम गंगे परियोजना के तहत क्षेत्रीय लोगों ने पर्यटक ग्राम हंडौर, कुंभापुर और मनगढ़ का दो दिवसीय भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीण जीवनशैली, पारंपरिक कलाओं और पुरानी सभ्यता से जुड़ी परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
भ्रमण का नेतृत्व विभाग के फील्ड ऑफिसर डॉ. प्रमोद शुक्ल ने किया। प्रतिभागियों ने सरपत से मूंज की रस्सी बनाने, गोपालन, उपले तैयार करने और धान की खेती की पारंपरिक विधियों को देखा। क्रॉप कटिंग के जरिए फसल उत्पादन की प्रक्रिया समझी। साथ ही ग्रामीण पर्यटन में होम स्टे की भूमिका और संभावनाओं की जानकारी ली।
हंडौर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा खिलौने बनाने की कला देखी गई। इसके अलावा पशुओं के लिए चारा काटने की मशीन, चकरी से आटा पीसने, मछली पालन, माटी कला और काड़ी से धान की कुटाई कर चावल तैयार करने की पारंपरिक विधियों से भी प्रतिभागी परिचित हुए।
डॉ. प्रमोद शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक हुनर को जीवंत बनाए रखना परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है। गांवों में आज भी अनेक ऐसी कलाएं और परंपराएं मौजूद हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से इन्हें नई पहचान देने के साथ स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे। उन्होंने नई पीढ़ी को पारंपरिक कला और ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया।इस दौरान समीर त्रिपाठी, रंजन कुमार, बालकृष्ण पांडेय, मो. रिजवान, सुजल शुक्ल, विकास पांडेय और अरविंद दुबे सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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